हम सब अंधविश्वासी हैं और रहेंगे
अगर सरल भाषा में कहें तो अंधविश्वास किसी भी चीज़ पर आँखें बंद करके विश्वास कर लेने को कहा जाता है। किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना पर बिना उसके सत्य की जाँच किए या अपनी तार्किक बुद्धि का इस्तेमाल किए बिना बस उसे मान लेना ही अंधविश्वास है।
अब अगर थोड़ी कठिन भाषा में कहें तो — हर वो चीज़ जिसकी वजह आपको पता नहीं है या जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, वह अंधविश्वास है। भले ही वो सही क्यों न हो, फिर भी वह अंधविश्वास ही है। हाँ, यह ज़रूर हो सकता है कि एक व्यक्ति के लिए वह विश्वास हो और वही चीज़ दूसरे व्यक्ति के लिए अंधविश्वास।
उदाहरण: अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से, जो कभी स्कूल नहीं गया हो, यह पूछें कि “अगर मैं एक पत्थर हवा में उछालता हूँ तो क्या होगा?” तो वह कहेगा — “वो ज़मीन पर गिर जाएगा।” वह बिल्कुल सही कह रहा है, फिर भी वह अंधविश्वास ही कर रहा है। हमारे लिए यह अंधविश्वास नहीं है, क्योंकि हमने गुरुत्वाकर्षण का नियम पढ़ा है और पत्थर के ज़मीन पर गिरने का कारण जानते हैं।
अब आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हम सब अंधविश्वासी थे, हैं और रहेंगे भी। क्योंकि यही जीने का सबसे आसान तरीका है। पुराने जमाने के अंधविश्वास की जगह नए जमाने के अंधविश्वास आते रहेंगे और यह चक्र हमेशा चलता रहेगा।
पहले के जमाने में जब किसी को साँप काट लेता था तो लोग उसे ओझा के पास ले जाते थे। ओझा झाड़-फूँक करके ज़हर उतारने का काम करता था। आज अगर किसी को साँप काट ले तो हम ओझा के पास नहीं जाएँगे, क्योंकि हमें पता है कि वह बस अंधविश्वास था। 10 में से 9 लोग ओझा के पास जाने से ठीक हो जाते थे, क्योंकि 10 में से 9 साँप उतने ज़हरीले नहीं होते कि इंसान मर जाए।
आज जब हमें बुखार होता है तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं। डॉक्टर 4 दवाइयाँ और 2 टेस्ट लिख देता है। यह नए जमाने का अंधविश्वास है।
अब आप सोच रहे होंगे कि मैं पागल हो गया हूँ और फालतू की बात कर रहा हूँ। तबीयत ख़राब होने पर तो डॉक्टर के पास ही जाते हैं, सब ऐसा ही करते हैं। तो मैं कहूँगा — पहले साँप काटने पर भी सब ओझा के पास ही जाते थे।
डॉक्टर के पास जाने में कोई बुराई नहीं है। फिलहाल हमारे पास इसके अलावा कोई बेहतर विकल्प भी नहीं है। लेकिन यह अंधविश्वास इसलिए है, क्योंकि हमने डॉक्टर से यह सवाल ही नहीं पूछा कि “बुखार आया ही क्यों?” अगर उसे पता नहीं है तो दवाई क्यों लिखी? और अगर पता है तो टेस्ट क्यों लिखे?
अगर आप थोड़ा रिसर्च करेंगे तो पता चलेगा कि बुखार अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर का एक प्राकृतिक बचाव तंत्र (defense mechanism) है। जब बैक्टीरिया या वायरस शरीर पर हमला करते हैं, तो इम्यून सिस्टम उनसे लड़ने के लिए शरीर का तापमान बढ़ा देता है। यह बढ़ा हुआ तापमान कीटाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है।
जहाँ भी तर्क और तथ्यों की जगह अंधविश्वास होगा, वहाँ हमारा फायदा उठाए जाने पर ज़ोर होगा, न कि हमें फायदा पहुँचाने पर। ठीक वैसे ही जैसे उन 4 दवाइयों और 2 टेस्टों में से ज़्यादातर डॉक्टर के फायदे के लिए होते हैं, न कि आपके।
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